Friday, September 27, 2019

सहजन पेड़ नही मानव के लिए वरदान है।

                   एक पेड़ अनेक गुण

सहजन के पेड़ को ड्रमस्टिक(drumstick) या मोरिंगा(Moringa) के नाम से जाना जाता है त्रिकोणीय मुड़ी हुआ फल है। सहजन के फायदे गुण लाभ अनेक है सहजन के पेड़ पर वर्ष में एक बार फूल और फिर फल लगते हैं। इसका फल पतला लंबा और हरे रंग का होता है जो पेड़ के तने से नीचे लटका होता है। सहजन के पेड़ का हर एक हिस्सा बहुत फायदेमंद होता है और खाने के साथ ही बीमारियों के भी इलाज में उपयोग किया जाता है।सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके अलग-अलग हिस्सों में 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण हैं। इसमें 92 तरह के मल्टीविटामिन्स, 46 तरह के एंटी आक्सीडेंट गुण, 36 तरह के दर्द निवारक और 18 तरह के एमिनो एसिड मिलते हैं। चारे के रूप में इसकी पत्तियों के प्रयोग से पशुओं के दूध में डेढ़ गुना और वजन में एक तिहाई से अधिक की वृद्धि की रिपोर्ट है। यही नहीं इसकी पत्तियों के रस को पानी के घोल में मिलाकर फसल पर छिड़कने से उपज में सवाया से अधिक की बृद्धि होती है। इतने गुणों के नाते सहजन चमत्कार से कम नहीं है।

सहजन का उपयोग :-

सहजन की पत्तियां एवं फूल घरेलू उपचार में हर्बल मेडिसिन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके फूलों एवं फलों को सब्जियों के रूप में उपयोग किया जाता है। सहजन का गुदा और बीज सूप, करी और सांभर में इस्तेमाल किया जाता है। सहजन का सूप इसकी पत्तियों, फूलों, गूदेदार बीजों से बनाया जाता है जो कि बहुत ही पोषक युक्त होता है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।इसके फूल, फली और टहनियों को अनेक उपयोग में लिया जा सकता है। भोजन के रूप में अत्यंत स्वादिष्ट और पौष्टिक है और इसमें औषधीय गुण भी हैं। इसमें पानी को शुद्ध करने के गुण भी मौजूद हैं। सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से दवाएं तैयार की जाती हैं। सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में है। सहजन में दूध की तुलना में ४ गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।

अनेकों अवषधिय गुण :-

सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है। सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है। सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गीसहजन की फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच ,शियाटिका ,गठिया में उपयोगी है। सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग के लिए उपयोगी है। छाल का उपयोग शियाटिका ,गठियाए,यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है। सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है, शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।

सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है। सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है। सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया ए जोड़ों के दर्दए वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है। सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है। सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है। सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा के दौरों में लाभ होता है। सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है। सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है। सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है जिससे जीवविज्ञान के नजरिए से मानवीय उपभोग के लिए अधिक योग्य बन जाता है।

सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तोए आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है।सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है। सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।

सहजन के फूल के फायदे यूटीआई के रोगों में :-

सूजन को कम करने वाली हर्बल क्रीम और मसल्स की पीड़ा को दूर करने वाली क्रीम बनाने में सहजन के फूलों का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा सहजन के फूलों का चाय बनाकर पीने से इसमें मौजूद पोषण की वजह से महिलाओं में यूटीआई की समस्या खत्म हो जाती है। इसके अलावा बच्चे को दूध पीलाने वाली महिलाओं को सहजन के फूलों का सेवन करने से दूध बढ़ता है।

सहजन के गुण स्पर्म बढ़ाने में सहायक :-

विटामिन के अलावा जिंक, कैल्शियम और आयरन जैसे मिनरल सहजन (drumstick) में पाये जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। पुरुषों में स्पर्म बनने में जिंक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और कैल्शियम खून की कमी नहीं होने देता है। सहजन की छाल में पाये जाने वाले यौगिक पतले सीमेन (semen) की समस्या को खत्म कर स्पर्म की संख्या बढ़ाने में मदद करते हैं।

सहजन के लाभ वजन घटाने में :-


एक शक्तिशाली मूत्रवर्धक का कार्य करने के कारण सहजन का इस्तेमाल करने से यह वजन घटाने में मदद करता है। यह एंटीबायोटिक और पेनकिलर का भी काम करता है और सूजन एवं दर्द दूर करने में सहायक होता है। इसकी सब्जी खाने से क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के मरम्मत में यह मदद करता है।

सेक्स के आनंद के लिए सहजन है गुणकारी :- 

यौन रोगों को दूर कर यौन शक्ति बढ़ाने, उत्तेजना पैदा करने और जननांगों की बीमारियों को दूर करने में भी सहजन का उपयोग बहुत लोकप्रिय है। अच्छा यौन सुख प्राप्त करने के लिए सहजन के फली का उपयोग किया जाता है।

भोजन पचाने में सहायक :-

विटामिन B-कॉम्पलेक्स एवं फोलिक एसिड, पाइरीडॉक्सिन सहजन की पत्तियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है यह ये सभी तत्व भोजन को आसानी से पचने में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। सहजन के पत्तियों में मौजूद विटामिन पाचन क्रिया को नियंत्रित करते हैं। इसकी सूखी पत्तियों का पावडर गर्म पानी से सेवन किया जा सकता है।

सहजन के फायदे चेहरे पर ग्लो के लिए :- 

पोषक तत्व जैसे विटामिन बी, प्रो विटामिन, बीटा-कैरोटीन और प्रोटीन आदि सहजन के पत्तियों में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। सहजन की पत्तियों का इस्तेमाल चेहरे पर चमक लाने और बालों की अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। सहजन की हरी पत्तियों को पीसकर चेहरे एवं बालों में लगाने से फायदा मिलता है।

सहजन के फायदे पानी को शुद्ध करने में :- 

स्वाद में मूली की तरह ही सहजन की जड़ का स्वाद होता है। सहजन का कटा हुआ जड़ की कुछ मात्रा मसालों के रूप में उपयोग की जाती है। इसका प्रयोग परफ्यूम, दवा, उर्वरक और पानी को शुद्ध करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए इसके जड़ को बहुत उपयोगी माना जाता है।

सहजन की जड़ के फायदे बीमारियों के इलाज में :- 

एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर होने के कारण सहजन की जड़ों का उपयोग बहुत सी बीमारियों को दूर करने में किया जाता है। सहजन अस्थमा, पाचन की बीमारी, गैस, त्वचा की समस्याएं, थायरॉइड और सूजन को दूर करने में बहुत लाभकारी होता है।

सहजन के तेल के फायदे मुंहासे के लिए :-

सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है जो बिना महक के एवं साफ होता है और इस तेल में बेहेनिक एसिड  की अधिक मात्रा पायी जाती है। सहजन के तेल को चेहरे पर लगाने से मुंहासे के दाग धब्बे  एवं ब्लैक स्पॉट दूर हो जाते हैं और चेहरा एकदम साफ हो जाता है। सहजन के बीज का प्रयोग शरीर एवं चेहरे को पोषण देने के लिए फेशियल मास्क और बॉडी मास्क के रूप में भी किया जाता है।h

सहजन की पत्तियों के फायदे पोषक तत्वों के लिए :- 

पालक की ही तरह  सहजन की पत्तियों को पकाकर खाने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा इसके पत्तियों को सूखाकर पावडर का इस्तेमाल किया जा सकता है या  सूप बनाकर पोषक तत्वों को प्राप्त किया जा सकता है।

त्वचा को जवा बनाये रखे :-

त्वचा पर होने वाली कोई समस्या या त्वचा रोग के लिए सहजन बेहद लाभदायक है। इसकी कोमल पत्त‍ियों और फूलों को भी सब्जी के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो आपको त्वचा की समस्याओं से दूर रखकर जवां बनाए रहने में भी मददगार है।

माहवारी की समस्या में फायदा :-

महिलाओं के लिए सहजन का सेवन फायदेमंद होता है। यह माहवारी संबंधी परेशानियों के अलावा गर्भाशय की समस्याओं से भी बचाए रखता है और बेहतर सेहत प्रदान करता है।

रोग-प्रतिरोधक बढ़ाने में :-

सहजन में विटामिन सी का स्तर उच्च होता है जो आपकी रोग प्रतरोधक क्षमता को बढ़ाकर कई बीमारियों से आपकी रक्षा करता है। तो अगर बीमारियों को दूर रखना है तो सहजन से दूरी न बनाएं।


बबासीर की समस्या में लाभ :-

बवासीर जैसी समस्याओं का इलाज भी सहजन के पास है। इसका सेवन करते रहने से बवासीर और कब्जियत की समस्या नहीं होती। वहीं पेट की अन्य बीमारियों के लिए भी यह फायदेमंद है।

सहजन के नुकसान :-

सहजन के फायदे आपने जाने लेकिन अधिक मात्रा में सहजन का सेवन से आपको इससे नुकसान भी हो सकता है आइये जानते है सहजन के नुकसान क्या है :-

१  प्रेगनेंट महिलाओं को सहजन का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा बना रहता है।

२  सहजन की पत्तियों में लैक्जेटिव गुण होता है जिसकी वजह से पेट गड़बड़ हो सकता है और अधिक सेवन करने पर सीने में जलन और डायरिया हो सकता है।

३  जिन लोगों का रक्त अधिक पतला है और वे किसी दवा का सेवन कर रहे हों उन्हें सहजन का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खून को अत्यधिक पतला कर देता है।





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